ऐ गीत,
उनसे जा कहो
यों हृदय
मेरा न देखें
चंचला संध्या न देखें
सहमा हुआ
सवेरा न देखें
प्रीति के प्रारंभ में
सम्बंध सारे जोड़ लें
किंतु, इस सम्बंध की
भावना के छंद की
आज ही आयु न पूछें
घाव का घेरा न देखें।
प्रणय की हर वेदना
यों भले ही क्रूर है
किंतु, उनके प्रेम की
हर क्रूरता मंजूर है
उनके समीप में
साथ में
मैं चाहता हर घात उनका
अपने कोमल हाथ में
उनसे कहो, ऐ गीत
वो भावभर मेरा न देखें
सौन्दर्य मुझमें खूब है
विरह से झुलसा हुआ
वो मेरा चेहरा न देखें।
बुधवार, 28 अप्रैल 2010
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सौन्दर्य मुझमें खूब है
जवाब देंहटाएंविरह से झुलसा हुआ
वो मेरा चेहरा न देखें
बहुत संवेदनशील रचना है....मेरे ब्लॉग पर आने के लिए आभार
सुन्दर रचना..बधाई.
जवाब देंहटाएं______________
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